यकीन ही मज़बूर करता हैं इंसान को यकीन ही मज़बूत करता है हैवान को यकीन हैं उन दरिंदो को यकीन है उन मौत के परिंदो को एक एक इंसान को मिटटी में सुपुर्दे ख़ाक कर देने का। उन्हे मौत से न शिकवा न गिला, उनकी दहशत से इंसानियत का ढांचा हिला। कब तक चुप बैठे रहोगे, कब तक ठप्प बैठे रहोगे, जब तक अंदरूनी नफ़रत रहेगी, तब तक उन कमीनो की, यही हरकत रहेगी, यही फितरत रहेगी। चारोँ तरफ कोहराम मचा हुआ है, मज़हब के नाम पर शमशान बना हुआ है, इनको लगता हैं वो करता हैं, उनको लगता है यह करता है, इनके उनके चक्कर में आवाम परेशान फक्कड़ में। कुछ स्वाभिमान कुछ विद्वान मानते है, मीठी- भाषा, ह्रदय-परिवर्तन जानते हैं, उन्होंने यकीन दिलाया सलाह मश्वरे से सब ठीक हो जायेगा बरसों से चल रही बात से निज़ात आएगा जो दूर हैं वो फिर पास आजायेंगे हर दिन ईद और दिवाली मनाएंगे। बात तो सही है, लोग तो पास आ गए, पहले यह जगह महफूज़ थी, अब यह मनहूस है। पहले हफ्तों हफ्तों मुलाक़ात न हो पाती थी, अब हर घंटे गुफ्तगू हो जाती है। बस, फर्क सिर्फ इतना है फ़ासला घर से कब्र जितना है, लाश उठाते कफ़न पहनाते रहते हैं, हर वक़्त जनाज़...